मंगलवार, 2 अगस्त 2022

अध्यात्मिक सुविचार






नियत का अर्थ हम सब जानते है आम भाषा में कि "सोच" या "विचार "  
लेकिन एक दिन मन में प्रश्न आया कि हमारी सोच की जड़ कहा है ? मतलब ये कहाँ से उत्पन होती है, तो जबाब आया कि हमारी मन की स्थिति कैसी है ? मतलब हमारे कैसे भाव है ? इन्ही भावों से हमारी सोच बनती है और जैसी सोच बनती है वैसे ही कर्म हम करते है और उन्हीं किये हुए कर्मों से हमारा जीवन बनता है |और जीवन में तो सब ही आ जाता है, जैसे हमारा स्थूल और सूक्ष्म शरीर, हमारे रिश्ते, हमारी जीवन शैली, ईश्वर और प्रकृति के प्रति समर्पण  

तो देखा जाए तो हमारी ज्ञानेंद्रिय से उत्पन हुए  या कई जन्मो के इकठे हुए हमारे संस्कार से उत्पन हुए भाव ही हमारी सोच बनाकर हमारा जीवन चला रहे है | इसलिए अगर हमारे भाव सत्वगुणी नहीं है तो, ये हमारे हृदय में विराजमान ईश्वर को काले बादलो की भाती घेर लेते है | और हम दुर्भाग्य की और अग्रसर हो जाते है | लेकिन अगर हमारे भाव सत्वगुणी है तो हम ईश्वर के समीप पहुँच अपने सौभाग्य के रचियता बनते है | 

इसलिए हमे हमारा जीवन सत्वगुण के अभाव में आये भाव रुपी काले बादलो को हटाने की कोशिश में निकलना शुरू कर देना चाहिये तभी हम कह सकते है कि ईश्वर हमारा जीवन चला रहा है और वो ही एक इंसान के लिए सौभाग्य की बात है |  

जीवन को अभी में इतना ही समझ पायी हूँ | 


डॉ. पूर्णिमा घई


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