Hi Beautiful & Peaceful Souls,
विशुद्ध मनुस्मृति के अनुसार मन, वचन और शरीर से किया जाने वाले अशुभ फल देने वाले कर्म इस प्रकार है|
परद्रव्येष्वभिध्यान मनसानिष्टचिन्तनम् |
वितथाभिनिवेशश्च त्रिविधं कर्म मानसम् ||
१. मानसिक बुरे कर्म- किसी के बारे में बुरा सोचना, किसी और की सम्पति को अपने अधीन करने का विचार करना और मिथ्या विचार करना और उसको सत्य मानना |
पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः |
असंबद्धप्रलापश्च वाडमयं स्याच्चतुविर्धम् ||
२. वाचिक बुरे कर्म- झूठ बोलना, कड़वे बोल बोलना जो दुसरो को चोट करे, किसी की चुगली करना और किसी की बुराई, अफवाह और लांछन लगाना|
अदतानामुपादानं हिसा चैवाविधानतः |
परदारोपसेवा च शारीरं त्रिविधं स्मृतम् ||
३. शारीरिक बुरे कर्म- किसी के धन की चोरी करना, रिश्वत लेना, व्यर्थ की हिंसा करना और पर स्त्री पर बुरी दृष्टि रखना |
यह सब बुरे कर्म रजोगुण और तमोगुण की अधिकता के कारण होते है इसलिए हमे हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए और सत्वगुण एकत्रित करना चाहिए जिससे हम सत्वगुणी बन सके|
~~ विशुद्ध मनुस्मृति
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Purnima
Ghai
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